Wednesday, November 14, 2012





जो सर्द हवाओं में फैली खुश्बू है,

जो बारिश की रिमझिम बूंदों का एहसास है,

जो टिम-टिम करते सितारों की तरह अलग है,

जो गहरे सागर में फैली शान्ति है,

जो पत्तों पर फैली ओस है,

जो गुलाबों की तरह खूबसूरत है,

जो बंद कली की मुस्कान है,

वह सब तुम्हारी पहचान है।

क्या तारिफ करूँ तुम्हारी,

सोचते ही दिल थम जाता है,

आस पास कुछ नहीं दिखता सिर्फ एक अश्क नजर आता है,

जहाँ की सुन्दरता एक पल में दिख जाती है,

महकती हवाओं की खुश्बू फिजाओं में फैल जाती है,

आँखों की गहराईयों में दिल डूब जाता है,

एक तुम्हारा ही एहसास मुझे इस दुनिया से अलग कर जाता है।