Wednesday, January 25, 2012

जय हिंद जय भारत...




कल रात से ही मुझे गणतंत्र दिवस की बधाइयाँ मिल रहीं। कुछ के जवाब दे पाया कुछ के नहीं, शायद में कुछ परेशान था इसलिए सबको जवाब नहीं दे पाया। रात भर ठीक से नींद नहीं आ पाई, सुबह उठा फेसबुक एकाउंट चेक किया तो पाया गणतंत्र दिवस पर ढेर सारे संदेश पोस्ट किए गये थे, फिर सभी को जवाब दिया। लेकिन मेरी समस्या अभी खत्म नहीं हुई मैं अभी भी परेशान हूँ, कुछ संदेशों में मैंने गणतंत्र दिवस की खुशियाँ पाईं तो कुछ में बुद्धजीवियों ने अपने-अपने तरीके से भारतीय परिदृश्य की कमियों पर भड़ास भी निकाली। आप सभी को मेरी तरफ से सलाम क्योंकि आपने देश के बारें में सोचने का समय तो निकाला। लेकिन मैं अभी भी परेशान हूँ। आखिर मैं परेशान क्यों हूँ, मैं जब इतिहास की किताब पढ़ने बैठता हूँ, तो हर जगह पाता हूँ, अंग्रेजों ने देश को दो हिस्सों में बाँट दिया। गलत है यह दोस्तों अंग्रेजों ने देश के दो हिस्से नहीं किए बल्कि हमने अपने देश को दो हिस्सों में बाँट दिया था। अगर हम एक साथ रहना चाहते तो किसी में भी इतना दम नहीं था जो हमारे प्यारे देश हमारी माँ को बाँट सकता। लेकिन यह भी मेरी समस्या का मुख्य कारण नहीं है। मुझे दुख है तो इस बात पर है कि हमारा देश आज भी बँटा हुआ। जाति,धर्म,वर्ण, लिंग, भाषा, क्षेत्र, आर्थिक आदि न जाने कितने शब्द हैं जो हमें आज भी बाँटे हुए हैं। और हम बेवकूफों की तरह संकीर्ण सोच पाले हुए हैं कि हम खास हैं हम अलग हैं। हमें यह हमेशा याद रखना चाहिए कि हम कुछ भी हों उससे पहले हम इंसान है, हम भारतीय हैं। हमें यह प्रतिज्ञा करनी होगी कि हम सभी अपने- अपने स्तर पर अपने देश, अपने समाज को बेहतर से बेहतर बनाने का प्रयास करेंगें। हम हर एक भारतीय के चेहरे पर खुशियाँ लाएंगें, हर एक को भोजन, शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, रोजगार मिले इसके लिए अपना योगदान देंगें। हम ऐसी किसी विचारधारा का समर्थन नहीं करेंगें जो हमें एक दूसरे से अलग करती हो। दोस्तों हमें यह आजादी बड़ी मुश्किल से मिली है और इसे दिलाने में एक पार्टी या व्यक्ति का योगदान नहीं था, बल्कि यह पूरे राष्ट्र की हुंकार थी जिसकी वजह से अंग्रेजों को भागना पड़ा। भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल, सुभाष चन्द्र बोस, वीर सावरकर, महात्मा गांधी, लाला लाजपत राय, सरोजनी नायडु.........दोस्तों हमें ऐसे हजारों नाम मिल जायेंगें जिन्होने हमें आजाद राष्ट्र देने के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। हमें अपनी आजादी का महत्व समझना चाहिए तथा अपने प्यारे देश भारत को एक खुशहाल राष्ट्र बनाने के लिए अपनी संकीर्ण मानसिकता को छोड़ सभी को एक दूसरे को अपनाना होगा तथा यह सोचना होगा कि देश को बेहतर बनाने के लिए हम क्या कर सकते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप कौन सा काम चुनते हैं जय हिंद जय भारत....